*प्रेस विज्ञप्ति*
*डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच, नई दिल्ली*
*दिनांक: 24 अप्रैल 2026, शुक्रवार*
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*विषय: “जाति नहीं, गरीबी आधार बने – आरक्षण पर बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल का स्पष्ट मत”*
*नई दिल्ली:* डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष *बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल जी* ने आरक्षण व्यवस्था पर एक मौलिक प्रश्न उठाते हुए कहा कि _“समय आ गया है जब ‘जाति प्रमाणपत्र’ की जगह ‘गरीब प्रमाणपत्र’ जारी किया जाए।”_
*बाबूजी का वक्तव्य:*
_“जाति प्रमाणपत्र नहीं, गरीब प्रमाणपत्र जारी किया जाए।_
_आरक्षण ‘जाति’ को नहीं, ‘गरीब’ को दिया जाए –_
_क्योंकि गरीब हर जाति में होते हैं।”_
बाबूजी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जिस *‘एक राष्ट्र, एक विधान’* की बात की थी, उसका मूल मंत्र *‘समरस समाज’* है। जब तक आरक्षण का आधार जन्म रहेगा, तब तक समाज में विभाजन की रेखा गहरी होती जाएगी।
*बाबूजी के 3 तर्क:*
1. *आर्थिक न्याय:* _“ब्राह्मण का बेटा भी भूखा सो सकता है, और दलित का बेटा भी करोड़पति हो सकता है। गरीबी जात देखकर नहीं आती।”_
2. *सामाजिक समरसता:* _“जब लाभ गरीबी के आधार पर मिलेगा, तो जातिगत वैमनस्य स्वयं समाप्त हो जाएगा। ‘सबका साथ, सबका विकास’ तभी संभव है।”_
3. *संवैधानिक भावना:* _“संविधान ने ‘सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन’ की बात की थी, ‘जन्म आधारित स्थायी पिछड़ेपन’ की नहीं।”_
*मंच का प्रस्ताव:*
1. *EWS की सीमा बढ़े:* वर्तमान 8 लाख की आय सीमा को व्यावहारिक बनाया जाए।
2. *सामाजिक ऑडिट:* जो परिवार एक बार आरक्षण से ऊपर उठ जाए, अगली पीढ़ी को सामान्य श्रेणी में रखा जाए।
3. *‘गरीब प्रमाणपत्र’:* ग्राम पंचायत स्तर पर आय व संपत्ति के आधार पर पारदर्शी प्रमाणपत्र बने।
_“सभी भाई अपने-अपने विचार रखें, पर राष्ट्र का विचार सर्वोपरि रखें। गरीब का कोई जाति नहीं होती, और भूख का कोई धर्म नहीं होता।”_ – बाबूजी
*जय समरस भारत | जय सनातन धर्म | जय भारत*
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*प्रेषक:*
*कार्यालय सचिव*
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच
*अस्थायी संचालन केंद्र:* मातृछाया बंगला, सरावगी मोहल्ला, वार्ड नं 19, राजगढ़, जिला चूरू, राजस्थान
*संपर्क:* 9414402558 | *वेबसाइट:* http://www.dspmrvm.com
*– बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल*
राष्ट्रीय अध्यक्ष
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